header ads

व्रत: जानें कब मनाई जाएगी अहोई अष्टमी, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। करवाचौथ के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। जो इस बार 08 नवंबर को पड़ रही है। यह व्रत संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। माताएं अहोई अष्टमी पर पूरा दिन उपवास रखती हैं और सायंकाल में तारे दिखाई देने के समय अहोई माता का पूजन करती हैं। 

इस दिन तारों को करवा से अर्घ्य दिया जाता है। यह अहोई माता गेरु आदि के द्वारा दीवार पर बनाई जाती है अथवा किसी मोटे वस्त्र पर अहोई काढ़कर पूजा के समय उसे दीवार पर टांगा जाता है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में...

499 साल बाद दिवाली पर दुर्लभ योग : गुरु व शनि खुद की राशियों में और शुक्र नीच राशि का

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त- शाम 05:31 से 18:50
अष्टमी तिथि प्रारम्भ- सुबह 07: 2 9 बजे से 
अष्टमी तिथि समाप्त- 09 नवम्बर सुबह 6:50 बजे

अहोई मां के बारे में
अहोई, अनहोनी शब्द का अपभ्रंश है। अनहोनी को टालने वाली माता देवी पार्वती हैं। इसलिए इस दिन मां पार्वती की पूजा-अर्चना का भी विधान है। अपनी संतानों की दीर्घायु और अनहोनी से रक्षा के लिए महिलाएं ये व्रत रखकर साही माता एवं भगवती पार्वती से आशीष मांगती हैं।

पूजा विधि 
अहोई अष्टमी के व्रत के दिन प्रात: उठकर स्नान करें और माता की पूजा करते हुए ये संकल्प करें कि मैं अपने पुत्र की लम्बी आयु एवं सुखमय जीवन के लिए अहोई माता का व्रत कर रही हूं। अहोई माता मेरे सभी पुत्रों को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखी रखें।

अहोई माता की पूजा के लिए लाल गेरू से दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनाएं और साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों का चित्र अंकित करें। फिर उनके सामने चावल की कटोरी, मूली, सिंघाड़े रखें और सुबह दीपक जलाकर कहानी पढ़ें। कहानी पढ़ते समय जो चावल हाथ में लिए जाते हैं, उन्हें साड़ी के पल्लू में बांध लेते हैं।

करवाचौथ से दिवाली तक इस माह में आएंगे कई महत्वपूर्ण त्यौहार

सुबह पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर करवे में पानी रखते हैं। यह करवा, करवा चौथ में उपयोग किया हुआ होना चाहिए। इस करवे का पानी दिवाली के दिन पूरे घर में छिड़का जाता है। संध्या काल में इन अंकित चित्रों की पूजा करें। भोजन में इस दिन चौदह पूरी और आठ पुए का भोग अहोई माता को लगाया जाता है।

इस दिन बायना निकाला जाता है 
बायने मैं चौदह पूरी, मठरी या काजू होते हैं। लोटे के पानी से शाम को चावल के साथ तारों को आर्घ्य किया जाता है। शाम को अहोई माता के सामने दीपक जलाया जाता है। पूजा और भोग का पूरा सामान किसी ब्रह्मण को दे दिया जाता है। अहोई माता का चित्र दीपावली तक घर में लगा रहना चाहिए।

अहोई माता की पूजा में एक अन्य विधान यह भी है कि चांदी की अहोई बनाई जाती है जिसे स्याहु कहते हैं। इस स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व भात से की जाती है। वैसे पूजा चाहे आप किसी भी विधि-विधान से करें लेकिन किसी भी विधान में पूजा के लिए एक कलश में जल भरकर रख लें। पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुने और सुनायें। पूजा के पश्चात सासु मां के चरण स्पर्शकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इसके पश्चात भोजन ग्रहण करें। 



.Download Dainik Bhaskar Hindi App for Latest Hindi News.
.
...
Ahoi Ashtami: know auspicious time and method of worship
.
.
.


Source From
RACHNA SAROVAR
CLICK HERE TO JOIN TELEGRAM FOR LATEST NEWS

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget