डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार बोर्ड के कक्षा 12वीं का रिजल्ट शुक्रवार का घोषित कर दिया गया। इस बार भी बिहार बोर्ड 12वीं के परिणाम में छात्राओं ने बाजी मारी है। साइंस, आर्ट्स व कॉमर्स.. हर संकाय में लड़कियों ने पहला स्थान हासिल किया है। साइंस स्ट्रीम में सोनाली कुमारी ने 471 अंकों के साथ टॉप किया है। सुनंदा कुमारी ने कॉमर्स स्ट्रीम में टॉप किया, जबकि मधु भारती और कैलाश कुमार कला में टॉपर रहे।
इस बार परीक्षा का पास प्रतिशत 78.04 प्रतिशत रहा। आर्ट्स स्ट्रीम का पास प्रतिशत 77.97 फीसदी, कॉमर्स स्ट्रीम 91.48 फीसदी था, जबकि साइंस स्ट्रीम का पास प्रतिशत 76.28 फीसदी रहा है। पिछले साल साइंस स्ट्रीम में पास प्रतिशत 80.44 % था। कॉमर्स स्ट्रीम में पास प्रतिशत 93.26% और आर्ट्स स्ट्रीम में पास प्रतिशत 81.44 प्रतिशत था।
इस साल 13.40 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। इसके अलावा, bihar.indiaresults.com और bsebbihar.com सहित कई निजी वेबसाइटों से भी रिजल्ट को डाउनलोड किया जा सकता है।
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(आईएएनएस)। विश्वविद्यालय ज्ञान का सृजन करने और ज्ञान का आदान-प्रदान करने वाले मंच रहे हैं। ये राष्ट्रों को एक ज्ञानवान समाज के रूप में तब्दील करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वक्त के साथ, विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगता गया, और सामाजिक परिवर्तन के माध्यम के रूप में उनका महत्व कम होता गया है। ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (जीपीपीआई) की ओर से जारी अकादमिक स्वतंत्रता सूचकांक में यह दर्शाया गया है कि कई देशों में विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता चुनौतीपूर्ण रही है। अल्बर्ट आइंस्टीन का एक वक्तव्य काफी प्रसिद्ध हुआ था, अकादमिक स्वतंत्रता की बदौलत, मैंने सत्य की खोज करने और सच को प्रकाशित करने और सच को बताने के अधिकार के बारे में समझा। इस अधिकार में कर्तव्य भी निहित है। किसी को भी किसी भी ऐसे हिस्से को छुपाना नहीं चाहिए जिसे सच माना जाता है।
एक प्रतिष्ठित भारतीय विश्वविद्यालय में हुई हालिया घटनाएं दुनिया भर में सार्वजनिक चिंता का विषय हैं और ये बहुत अधिक प्रासंगिक भी हैं और इनका संबंध अकादमिक स्वतंत्रता, संस्थागत स्वायत्तता और नियामक कठोरता से है। जब सार्वजनिक क्षेत्र में अकादमिक स्वतंत्रता के कई मुद्दों पर बहस हो रही है, हमें इन मुद्दों का गहन और अधिक बारीक विश्लेषण करना चाहिए क्योंकि इससे ही भारत और दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के भविष्य को आकार मिलेगा।
शुरूआत में, यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अकादमिक स्वतंत्रता दुनिया के किसी भी विश्वविद्यालय के लिए मौलिक है। लोकतंत्र के लिए यह गर्व का विषय होता है कि लोकतांत्रिक समाजों में वैसे अनमोल स्थान सुरक्षित होते हैं जहां बोलने की स्वतंत्रता की विधिवत रक्षा की जाती है और और उसे बढ़ावा दिया जाता है। ऐसे लोकतंत्र में, जहां विभिन्न विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है, वहां किसी भी तरह की वैचारिक हठधर्मिता चाहे वह वामपंथी हो या दक्षिणपंथी वह विश्वविद्यालयों के लिए ठीक नहीं होती है। अकादमिक स्वतंत्रता के केंद्र में लगातार लोकतांत्रिक आदशरें का संरक्षण, बहुलतावाद को बढ़ावा और लोकतांत्रिक संस्थाओं का पोषण करना रहा है।
शिक्षक के रूप में हमारी चुनौती सामाजिक संगठनों के रूप में एक जटिल भूमिका निभाने वाले विश्वविद्यालयों की पहचान करना है। कोई भी अद्वितीय परिस्थितियां अपने संस्थागत संदर्भ में अकादमिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए किसी सार्वजनिक या निजी विश्वविद्यालय का पक्ष नहीं लेती हैं। हालांकि, निस्संदेह रूप से ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारक कुछ समाजों में शैक्षणिक स्वतंत्रता को संस्थागत बनाने में योगदान दे रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मूलभूत उद्देश्य संस्थागत स्वायत्तता सुनिश्चित करते हुए शैक्षणिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है जिसके लिए निम्नलिखित तीन सिद्धांत महžवपूर्ण हैं। पहला, शिक्षकों और कर्मचारियों की सभी नियुक्तियां, समीक्षा और मूल्यांकन पूरी तरह से विश्वविद्यालय के भीतर किया जाना चाहिए। वे योग्यता और कार्य पर आधारित हो और विश्वविद्यालय की नीतियों, नियमों और विनियमों के आधार पर होना चाहिए। इन प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए निर्णय लेने की शक्तियों को विश्वविद्यालय के नेतृत्व में निहित किया जाना चाहिए, जिसमें संकाय और कर्मचारी शामिल हों। दानकर्ता चाहे वो कितना भी महžवपूर्ण हो, सहित सभी बाहरी लोगों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाना चाहिए। अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किसी विश्वविद्यालय के आंतरिक प्रशासन का अधिकार पूरी तरह संकाय सदस्यों के पास होना चाहिए न कि विश्वविद्यालय के बाहर के किसी के पास।
दूसरा, कार्यक्रम, पाठ्यक्रम, कोर्स, शिक्षण और स्कूलों / विभागों की स्थापना से संबंधित सभी निर्णय विश्वविद्यालय की नीतियों, नियमों और विनियमों के अनुसार विश्वविद्यालय के भीतर निर्धारित किए जाने चाहिए और निर्णय लेने की सभी शक्तियां विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के पास होने चाहिए। जब ये निर्णय विभिन्न सरकारी और नियामक निकायों द्वारा दिए गए कानूनों, नियमों, विनियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप होते हैं और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम मानदंडों पर आधारित होते हैं, तो विश्वविद्यालय के बाहर के किसी भी व्यक्ति को इन निर्णयों को नियंत्रित या प्रभावित नहीं करना चाहिए।
और तीसरा, संकाय सदस्यों के प्रकाशन सहित उनके द्वारा किए गए अनुसंधान से संबंधित सभी निर्णय अकादमिक स्वतंत्रता और बौद्धिक स्वायत्तता के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। वे संकाय सदस्य जो अकादमिक अनुसंधान में शामिल हैं, उन्हें शोध के विषय और अनुसंधान के परिणाम सहित शोध परियोजनाओं को निर्धारित करने के लिए पूर्ण स्वायत्तता मिलनी चाहिए। जब संकाय सदस्य ऐसे अनुसंधान और प्रकाशनों में व्यस्त रहेंगे तो सत्ता से सच बाहर आएगा और यह साक्ष्य पर आधारित होना चाहिए, खासकर जब अनुसंधान का उद्देश्य नीति-निर्माण को सूचित करना हो।
इसके बाद हमें अकादमिक स्वतंत्रता को भारतीय विश्वविद्यालयों में सार्थक रूप से स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के दो केंद्रीय पहलुओं के महत्व को पहचानने की आवश्यकता है। एक, नियामक स्वतंत्रता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने भारतीय विश्वविद्यालयों को सशक्त बनाने के लिए पर्याप्त नियामक सुधारों की परिकल्पना की है।
सार्वजनिक या निजी, भारत में विश्वविद्यालय प्रभावी आंतरिक प्रशासन के लिए कई हितधारकों पर निर्भर होते हैं। ये हितधारक संस्था के अंदर और बाहर के होते हैं। पर्याप्त नियामक स्वतंत्रता प्राप्त किए बिना, कोई भी विश्वविद्यालय वास्तव में स्वायत्त तरीके से कार्य नहीं कर सकता है और संकाय सदस्यों और छात्रों की शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा नहीं कर सकता है। मेरा मानना है कि यह एनईपी 2020 का लक्ष्य है, जो अखंडता, पारदर्शिता और संसाधन दक्षता को सुनिश्चित करने के लिए एक हल्का लेकिन कसा हुआ विनियामक ढांचा को बढ़ावा देता है, और स्वायत्तता, अच्छे शासन और सशक्तिकरण के माध्यम से नवाचार और सबसे अलग विचारों को प्रोत्साहित करता है।
दूसरा, विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है जिसमें सभी हितधारकों के साथ उचित परामर्श के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। परामर्श, संचार और आम सहमति बनाने की आवश्यकता अनिवार्य है। हालांकि, निर्णयों की वैधता और स्वीकृति के लिए, सभी हितधारकों के बीच विश्वास, सम्मान और एक साथ गवर्नेंस का मौलिक और मूलभूत पहलू होना चाहिए। वरना असहमति से पारस्परिक संबंध कटुतापूर्ण हो सकते हैं जो शैक्षणिक और बौद्धिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं और विश्वविद्यालयों को इसके खिलाफ चौकसी बरतनी चाहिए।
एनईपी 2020 की ²ष्टि और परिकल्पना को अगर सही अर्थ में और सही तरीके से लागू किया जाए तो इससे भारतीय विश्वविद्यालयों की उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा और विश्वविद्यालय राष्ट्र-निर्माण में योगदान करते हुए विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने में सक्षम होंगे। राष्ट्र, संस्थानों, विशेष रूप से विश्वविद्यालयों के लिए 'आत्मनिर्भरता, स्वतंत्रता, स्वायत्तता और शासन के मूल सिद्धांतों के साथ जुड़ा हुआ है।
(प्रोफेसर सी राज कुमार, जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) के संस्थापक कुलपति हैं।)
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जेईई मेन परीक्षा सीजन 2 के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। यह परीक्षाएं पहली बार क्वालालंपुर और लागोस जैसे विदेशी शहरों में भी आयोजित की गई। भारत सरकार के सहयोग से इन परीक्षाओं को 12 विदेशी शहरों और 334 भारतीय शहरों में आयोजित किया गया।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा ली गई इन परीक्षाओं में 13 छात्रों ने शत प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है। शत प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्रों में राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सेंटर के छात्र शामिल हैं। इन सभी 13 छात्रों ने जेईई मेन परीक्षा में 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं।
छात्र अपना परीक्षा परिणाम एनटीए की वेबसाइट पर देख सकते हैं। जेईई मेन परीक्षा, एनटीए द्वारा 16 से 18 मार्च 2021 तक आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में बी.ई. और बी.टेक के लिए कुल 6.19 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत थे।
विदेशी केंद्रों में कोलंबो, दोहा, दुबई, काठमांडू, मस्कट, रियाद, शारजाह, सिंगापुर, कुवैत, क्वालालंपुर और लागोस शामिल हैं। 334 भारतीय शहरों में भी यह परीक्षा आयोजित की गई थी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के मुताबिक अब अप्रैल और मई में होने वाली जेईई मेन परीक्षाओं के बाद छात्रों की औसत रैंक घोषित की जाएगी।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को कहा, एनटीए ने पेपर बीई और बीटेक के लिए जेईई (मुख्य) 2021 (मार्च सत्र) स्कोर घोषित किया है। 619638 उम्मीदवारों ने पंजीकृत किया। उस परीक्षा को साझा करने में प्रसन्नता हुई, जो 13 भाषाओं में दूसरी बार और 334 शहरों में (भारत के बाहर 12 शहरों सहित) में आयोजित की गई थी।
परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों द्वारा मोबाइल या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से अनुचित व्यवहार को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर 25557 जैमर लगाए गए थे। कोविड 19 सावधानियों के साथ परीक्षाएं आयोजित की गईं।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एसेंशियली हेल्दी प्राइवेट लिमिटेड (इएचपीएल), जो कि एस.के. बाजोरिया ग्रुप कंपनी का एक हिस्सा है, इस कंपनी की तरफ से लोगों को शेहतमंद रखने के लिए ‘श्यूराइट’ एप लॉन्च किया गया। डिजीटल तकनीक से हेल्थकेयर से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के साथ यह एप आपको शेहतमंद बनाये रखने में काफी मददगार साबित होगा। इसे ऐप स्टोर और प्ले स्टोर दोनों ही के माध्यम से ‘श्यूराइट’ एप को डाउनलोड किया जा सकेगा। हमारे वेब पोर्टल www.surite.in पर भी यह सहजतापूर्वक उपलब्ध है।
प्रौद्योगिकी एवं कुदरत की शक्ति के उपयोग से श्यूराइट एप स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं को एक साथ सामान्य मंच पर लाता है और उन्हें बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर कल्याणकारी उत्पादों के जरिये लोगों को अपने साथ जोड़ने में मदद करता है।
स्मिता बाजोरिया (मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक, ईएचपीएल) ने कहा, भारत की डिजिटल हेल्थकेयर क्रांति में श्यूराइट सबसे आगे होंगा। हम उच्च गुणवत्ता के साथ सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देकर पूरे भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर और बेहतर डिजिटल चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के मामले में बदलाव करते रहेंगे।
श्यूराइट यह सुनिश्चित करता है कि इसके उपयोगकर्ता, सेवा प्रदाता, विक्रेता, ग्राहक और लोग वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से इससे जुड़नेवाले अन्य सभी लोग समय पर सही जानकारी, सेवाएं और सुझाव प्राप्त कर सकें। श्यूराइट को कोसिविव हेल्थकेयर सेवाओं के महत्व को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसका मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा उद्योग में लोगों के बीच वर्तमान समस्याओं को दूर करना है।
लॉन्चिंग के पहले चरण में डॉक्टर, परामर्शदाता और डायग्नोस्टिकसेंटर से जुड़े अधिकारी एवं प्रतिनिधि इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा इसमें एक ई-फार्मेसी और वेलनेस स्टोर में हेल्थकेयर और वेलनेस उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला की स्थापना की गई है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बाद में यह एक समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बनने के उद्देश्य से विभिन्न वर्टिकल को रोल आउट करेगा और लोगों को सहायता प्रदान करेगा, क्योंकि हम हमेशा बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का प्रयास करते हैं।
बाजोरिया ने कहा, हम भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, उत्पादों और टेली-मेडिसिन के सबसे बड़े वेब और मोबाइल-आधारित एग्रीगेटर और फैसिलिटेटर बनना चाहते हैं। जिससे हर समय लोगों से जुड़े रहकर उनकी सेवा कर सके।
डॉक्टर नियुक्तियां: श्यूराइट एप से जुड़कर शहर में कभी भी और कहीं से भी अपनी समस्याओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में बताकर डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं!
रोजाना परीक्षण: एक साधारण प्रयोगशाला परीक्षण या व्यापक स्वास्थ्य पैकेज, उपयोगकर्ता के सामर्थ्य के अनुकूल यह ऐप सब कुछ ला सकेगा।
फार्मेसी स्टोर: अपने घर के आराम से ऑनलाइन दवाओं का ऑर्डर करें और हमारे जरिये उन्हें बिना किसी झिझक व परेशानी के अपने दरवाजे से उसे कलेक्ट कर लें।
वेलनेस स्टोर: मेडिकल उपकरण से लेकर ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों तक, मनोरंजन के सुख से लेकर वेलनेस कपड़ों तक, श्यूराइट आपके द्वार तक पहुंचाई जाने वाली हर चीज को लाएगा !
अस्पताल में भर्ती सेवाएं: श्यूराइट रोगियों को बिना किसी परेशानी के सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास अस्पताल में भर्ती होने में मदद करता है।
एम्बुलेंस सेवाएं: श्यूराइट के साथ जुड़कर कोई भी कभी भी और कहीं भी एम्बुलेंस सेवाओं को बुक कर सकता है।
होम केयर सेवाएं: नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, व्यक्तिगत प्रशिक्षकों और अन्य ऐसी ही सेवाओं को श्यूराइट के साथ घर पर आराम से प्राप्त करें।
उपयोगी सेवाएं: श्यूराइट सदस्यता-आधारित चिकित्सीय सेवा प्रदान करने में सक्षम है, जिसमें व्यक्तिगत डॉक्टर का दौरा, स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य और पोषण, चिकित्सा देखभाल, बुजुर्गों की देखभाल, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए फिटनेस, और आपके घर पर कई अन्य शामिल हैं।
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डिजिटल डेस्क, मुंबई। देश में कोरोनावायरस का पहला मामला सामने आने के बाद से मुंबई में शुक्रवार को पहली बार एक ही दिन में 3,000 से अधिक कोविड-19 मामले दर्ज किए गए हैं। मुंबई के साथ ही पूरे प्रदेश में ही कोरोना का कहर जारी है। इस बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चेतावनी दी है कि भविष्य में लॉकडाउन ही एक विकल्प है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में 25,681 नए कोरोना मामले जुड़ गए हैं, जो कि गुरुवार को उच्चतम 25,833 नए रोगियों से भी अधिक हैं। राज्य में अभी तक कुल 24,22,021 कोरोना मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
इसी तरह अकेले मुंबई में ही पिछले 24 घंटों के दौरान 3,063 नए मामले सामने आए, जिसके बाद शहर में कुल मामलों की संख्या 355,914 तक पहुंच गई, जिससे नागरिक स्वास्थ्य अधिकारियों को झटका लगा। दूरदराज के आदिवासी इलाकों में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा के बाद नंदुरबार में ठाकरे ने मीडियाकर्मियों से कहा, लॉकडाउन भविष्य के लिए एक विकल्प है, क्योंकि मैं इसे देख सकता हूं। लेकिन मैं सभी लोगों से स्वैच्छिक सहयोग की उम्मीद करता हूं।
स्वास्थ्य सचिव प्रदीप व्यास ने आगाह किया कि यदि मामलों में मौजूदा दर से वृद्धि जारी रही, तो 1 अप्रैल तक, राज्य के सक्रिय मामले वर्तमान 1.77 लाख से 3 लाख हो सकते हैं। ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों को टीका लगाया गया है और जो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं उन्हें अनिवार्य रूप से मास्क पहनना होगा, शारीरिक दूरी बनाए रखनी होगी और स्वच्छता सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा, अब एक साल हो गया है और हम महामारी से जूझ रहे हैं। हमने इसे नियंत्रण में लाया है, लेकिन अब अचानक उछाल आया है, जो चिंता का विषय है। सरकार ने सभी सिनेमा हॉल, ऑडिटोरियम, ड्रामा हॉल आदि को केवल 50 प्रतिशत की क्षमता पर संचालित करने और सभी मानदंडों का पालन करने का आदेश दिया है। दिन के दौरान 70 और मौतों के साथ, राज्य में मरने वालों की संख्या बढ़कर 53,208 हो गई है।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में कोविड -19 के पिछले 24 घंटों में 716 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि शुक्रवार को चार और मौतें हुईं। ऐसा पहली बार हुआ जब राष्ट्रीय राजधानी में इस साल 700 कोविड -19 मामले दर्ज किए गए। अंतिम बार 700 से अधिक मामले 27 दिसंबर (757 मामलों) को दर्ज किए गए थे। शहर में गुरुवार को 609 मामले दर्ज किए गए थे।
स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, शुक्रवार को रिकवरी दर 97.81 प्रतिशत थी, जबकि मृत्यु दर 1.69 प्रतिशत थी। दैनिक सकारात्मकता दर 0.93 प्रतिशत थी। दिल्ली का कुल मिलाकर अब कोरोना के 6,46,348 मामले है, जबकि मरने वालों की संख्या 10,953 हो गई है। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 3,165 हो गई है। इस बीच, पिछले 24 घंटों में 471 लोग इस बीमारी से उबर पाए, जो राष्ट्रीय राजधानी की कुल रिकवरी को 6,32,230 तक ले गए। पिछले 24 घंटों में कुल 77,352 नए नमूनों का परीक्षण किया गया और इसमें 47,078 आरटी-पीसीआर परीक्षण और 30,274 रैपिड एंटीजन परीक्षण शामिल हैं।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने मेडिकल में प्रवेश के लिए NEET 2021 परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है। इस बार यह परीक्षा 1 अगस्त 2021 को 11 भाषाओं में आयोजित की जाएगी। एनटीए की ऑफिशयल वेबसाइट nta.ac.in पर एमबीबीएस/बीडीएस में प्रवेश के लिए होने वाली नीट परीक्षा की तारीख का ऐलान किया गया है। नीट 2021 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। नीट परीक्षा में हर साल करीब 14 लाख छात्र आवेदन करते हैं।
नीट 2021 के लिए ऐसे करें आवेदन
साल में एक बार होगी NEET की परीक्षा
इससे पहले राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के महानिदेशक विनीत जोशी ने घोषणा की थी कि नीट यूजी परीक्षा साल में एक बार ही आयोजित होगी। उन्होंने कहा था कि नीट यूजी परीक्षा तारीख की घोषणा इस हफ्ते की जाएगी। जैसे ही नीट यूजी परीक्षा 2021 की तिथि जारी होगी अभ्यर्थी इस प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे।
खबर में खास
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जेईई मेन परीक्षा के नतीजे सोमवार रात घोषित कर दिए गए। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा ली गई इन परीक्षाओं में 6 छात्रों ने शत प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है। सोमवार को केवल पेपर 1 (BE और BTech) के अंक घोषित किए जा रहे हैं। पेपर 2 ए और 2 बी (बी आर्क और बी प्लानिंग) के परिणाम अगले कुछ दिनों में जारी किए जाएंगे। छात्र अपना परीक्षा परिणाम NTA की वेबसाइट पर देख सकते हैं।
ऐसे चेक करें रिजल्ट
41 कैंडिडेट्स ने टॉपर्स लिस्ट में जगह बनाई
शत प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्रों में राजस्थान सेंटर के साकेत झा, चंडीगढ़ सेंटर से गुरमीत सिंह, दिल्ली एनसीआर से प्रवर कटारिया और रिमझिम दास, महाराष्ट्र सेंटर से सिद्धांत मुखर्जी और गुजरात सेंटर से अनंत कृष्ण शामिल हैं। इन सभी छात्रों ने जेईई मेन परीक्षा में 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं। कुल 41 कैंडिडेट्स ने टॉपर्स लिस्ट में जगह बनाई है। हालांकि, ऑल इंडिया रैंकिंग फरवरी, मार्च, अप्रैल और मई सेशन के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों की औसत रैंक घोषित की जाएगी।
दूसरा सत्र 15 से 18 मार्च तक
पहले चरण की परीक्षा 23 से 26 फरवरी, 2021 को हुई थी। इसके बाद दूसरा सत्र 15 से 18 मार्च तक, तीसरा सत्र 27 से 30 अप्रैल तक और चौथा सत्र 24 से 28 मई 2021 तक आयोजित किया जाएगा। अगले चरणों की परीक्षा भी दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा की पहली पारी सुबह 09 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा 03 से 06 बजे तक आयोजित की जाएगी।
शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने छात्रों को बधाई दी
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, जेईई (मुख्य) फरवरी सत्र 2021 के परिणाम सामने हैं। छात्रों को बधाई। पिछले साल तक, परीक्षा केवल 3 भाषाओं में होती थी, लेकिन इस बार परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी और परिणाम 10 दिनों में घोषित किए गए हैं।
खबर में खास
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में नई शिक्षा नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जोर-शोर से तैयारियां कर रही है। कई राज्यों में इसे लेकर समितियां भी बनाई गईं हैं। लेकिन, यह तभी संभव होगा जब सरकारी स्कूल बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाएंगे। इसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि देशभर के सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हों।
देशभर में शिक्षकों के 61 लाख 84 हजार 464 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 10 लाख 60 हजार 139 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। पूरे देश में शिक्षकों का सबसे ज्यादा टोटा तो बिहार और यूपी में हैं। इनके बाद झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद के पटल पर एक प्रश्न के जवाब में दी।
कहां कितने पद खाली
नियुक्ति प्रक्रिया भी जारी
बिहार में राज्य सरकार की ओर से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 94 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 30 हजार 200 पदों पर और एसटीईटी के माध्यम से 33 हजार 916 पदों पर शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। इन पदों के लिए परीक्षा भी आयोजित की जा चुकी है।
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