डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज (17 अक्टूबर, शनिवार) से हो चुकी है। शक्ति और भक्ति के इस पर्व में सभी लोग श्रद्धा और यथा शक्ति के अनुसार मां भगवती की आराधना करते हैं। नवरात्रि का पहला दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को समर्पित होता है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें प्रकृति स्वरूपा भी कहा जाता है।
माना जाता है कि मां शैलपुत्री सुख-समृद्धि की दाता होती हैं। नवरात्रि के पहले दिन इनकी पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्रप्ति होती है। शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। आइए जानते हैं कैसे करें पहले दिन पूजा और मां शैलपुत्री की आराधना...
शारदीय नवरात्रि आज से, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
स्वरूप
मां शैलपुत्री के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं में कमल है। उनकी सवारी नंदी माने जाते हैं। देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुर्नजन्म लिया और वह फिर वह शैलपुत्री कहलाईं। ऐसा माना जाता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।
ऐसे करें मां शैलपुत्री की पूजा
मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें। उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर केसर से शं लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें।हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें।
पूजा विधि
मां शैल पुत्री श्री दुर्गा का प्रथम रूप हैं। इनकी पूजा पूजा में विधि-विधान का विशेष ध्यान देना चाहिए। अतः पहले दिन मां के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की समाग्री को संग्रहित करके शौचादि क्रियाओं से निवृत्त होकर षोडषोपचार विधि से करना चाहिए। यदि सम्भव हो तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या करवाएं और क्षमा प्रार्थना करना चाहिए। प्रकृति स्वरूपा को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग विधान के अनुसार अलग-अलग मंत्र हैं, किंतु अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुसार इस मंत्र के जाप कर सकते हैं-
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ऐश्वर्यं यत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः।
शत्रुहानि परो मोक्षः स्तूयते सा न किं जनैः। ।
न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि। ।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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