उत्तराखंड के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यनुनोत्री में देशभर से भक्त पहुंचने लगे हैं। अब राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लेकर आने का नियम खत्म कर दिया है। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् बोर्ड की वेब साइट पर यात्री रजिस्ट्रेशन कराकर ई-पास प्राप्त कर सकते हैं। इस ई-पास से चारधाम में दर्शन किए जा सकते हैं।
4 अक्टूबर को राज्य सरकार ने इन चारधामों में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या बढ़ा दी है। पहले चारों मंदिरों के लिए प्रतिदिन 3,000 भक्तों को ही अनुमति मिलती थी, लेकिन अब 7,600 भक्तों यात्रा करने की अनुमति रोज मिल सकेगी। नए नियम के बाद 3-3 हजार भक्त बद्रीनाथ और केदारनाथ के दर्शन कर सकेंगे। 900 यात्री गंगोत्री में और 700 यमुनोत्री में पहुंच सकेंगे।

- यात्रियों के लिए खुल चुके हैं गेस्ट हाउस और होटल्स
चारधाम यात्रा के लिए आने वाले बाहरी लोगों के लिए गेस्ट हाउस और होटल्स भी खुल चुके हैं। मंदिर के आसपास की सभी दुकानें, धर्मशालाएं और अन्य धर्म स्थल भी खुल रहे हैं। यहां आने वाले भक्तों को कोरोना महामारी से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है। सभी को मास्क लगाना होगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।
नेशनल लॉकडाउन के बाद 1 जुलाई से इन चारों मंदिरों में दर्शन व्यवस्था शुरू हो चुकी है। अब तक 98 हजार से ज्यादा यात्रियों में बोर्ड की वेबसाइट पर दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। 50 हजार से ज्यादा भक्तों ने यहां दर्शन किए हैं।
यहां आने भक्तों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। यात्रियों की थर्मल स्केनिंग हो रही है। अगर किसी यात्री में कोरोना से संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे दर्शन करने की अनुमति नहीं मिल सकेगी।
हेलीकॉप्टर से आने भक्तों को वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है। इन लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण की जिम्मेदारी हेलीकॉप्टर कंपनी की ही रहेगी।

- चारों मंदिरों का पौराणिक महत्व
बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के ही नहीं, देश के मुख्य चार धामों में से एक है। ये मंदिर नर-नारायण पर्वतों के बीच में स्थित है। यहां के पुजारी को रावल कहा जाता है। इस समय रावल ईश्वरप्रसाद नंबूदरी हैं। रावल आदि गुरु शंकराचार्य के कुटुंब से ही नियुक्त किए जाते हैं।
केदारनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में पांचवां ज्योतिर्लिंग है। यहां शिवजी का स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि नर-नारायण ने यहां शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुए थे।
गंगोत्री गंगा नदी का और यमुनोत्री यमुना नदी का उद्गम स्थल है। यहीं से ये दोनों नदियां निकलती हैं।
ये चारों मंदिर हर साल निश्चित समय के लिए ही भक्तों के खुलते हैं। शीतकाल में यहां का वातावरण बहुत ठंडा हो जाता है। इस वजह से इन मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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