डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है। इस दिन व्रत करने के साथ ही भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। सभी एकादशी में अधिक माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली परम एकादशी विशेष मानी गई है। जो कि 13 अक्टूबर दिन मंगलवार को है। वैसे तो प्रत्येक एकादशी व्रत जीवन में सुख-समृद्धि की कामना व मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है। लेकिन अधिक मास में व्रत-उपवास, दान-पुण्य करने का महत्व अधिक ही होता है।
चूंकि परम एकादशी का व्रत जो महीना अधिक हो जाता है उस पर निर्भर करता है। इसीलिए परम एकादशी का उपवास करने के लिए कोई चन्द्र मास तय नहीं है। वहीं यह एकादशी अधिक मास में आने के कारण अधिक मास एकादशी के नाम से भी जानी जाती है।
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मुहूर्त
तिथि प्रारम्भ: 12 अक्टूबर 2020 शाम 04 बजकर 38 मिनट से
तिथि समाप्त: 13 अक्टूबर 2020 दोपहर 02 बजकर 35 मिनट तक
व्रत विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके साफ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
- फिर अपने पितरों का श्राद्ध करें।
- भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें।
- ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवायें और उन्हें दक्षिणा दें।
- इस दिन परमा एकादशी व्रत कथा सुनें।
- एकादशी व्रत द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त में खोलें।
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दान का महत्व
शास्त्रों में परमा एकादशी को दान के लिए भी उत्तम बताया गया है। इस दिन धर्मिक पुस्तक, अनाज, फल, मिठाई दान करने का विधान है। जो लोग किसी कारण यह व्रत नहीं कर सकते उन्हें व्रत का पुण्य प्राप्त करने के लिए इन वस्तुओं का दान करना चाहिए। दान करते समय यह ध्यान रखें कि, धार्मिक पुस्तक उसे ही दान करें जो ईश्वर एवं धार्मिक पुस्तकों के प्रति आस्था रखता हो।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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