डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें नौंवा और आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री का समर्पित होता है। नवदुर्गा के सिद्धि और मोक्ष देने वाले स्वरूप को सिद्धिदात्री कहते हैं। इस वर्ष मां सिद्धिदात्री की पूजा शनिवार और रविवार दोनों दिन की जा रही है। दरअसल, कई लोगों को इस तिथि को लेकर असमंजस है। बता दें कि ज्योतिषों के अनुसार नवमी तिथि 24 अक्टूबर को 6 बजकर 59 मिनट से 25 की सुबह 7 बजकर 42 तक है। ऐसे में कुछ लोग आज वहीं कुछ लोग कल यानी कि रविवार को इस तिथि को मान रहे हैं।
यह सभी जानते हैं कि, नवरात्रि के अंतिम दिन पुराणिकशास्त्र की विधि-विधान और माता की पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को इस दिन सर्व सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले भक्त सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। इससे उन्हें यश, बल और धन की प्राप्ति होती है।
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स्वरूप
अपने सांसारिक स्वरूप में देवी सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और हाथों में कमल, शंख, गदा, सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप हैं, जो श्वेत वस्त्रालंकार से युक्त महाज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं।
लगाएं प्रसाद और भोग
नौवें दिन सिद्धिदात्री को मौसमी फल, हलवा, पूड़ी, काले चने और नारियल का भोग लगाया जाता है। जो भक्त नवरात्रों का व्रत कर नवमीं पूजन के साथ समापन करते हैं, उन्हें इस संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन दुर्गासप्तशती के नवें अध्याय से मां का पूजन करें। नवरात्र में इस दिन देवी सहित उनके वाहन, सायुज यानी हथियार, योगनियों एवं अन्य देवी देवताओं के नाम से हवन करने का विधान है इससे भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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ऐसे करें कन्या पूजन
मां दुर्गा की पूजा में अष्टमी और नवमीं दोनों का ही विशेष महत्व होता है। मां की पूजा के बाद कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है। उन्हें मां के प्रसाद के साथ दक्षिणा दी जाती है और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है। बता दें कि सनातन धर्म में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रुप माना जाता है, ऐसे में कन्या पूजन के दौरान उन्हें लाल चूड़ी और लाल चुनरी चढ़ाई जाती है। साथ ही उन्हें भोग में चढ़ाया हुआ प्रसाद खिलाया जाता है उनके पैर धोए जाते हैं।
कन्या पूजन में उनके पैर धुलने के बाद मौली और मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी पूजन करें। साथ ही कन्याओं को हलवा,पूरी और काले चने का प्रसाद दें। इसके बाद उन्हें भेंट स्वरूप कोई चीज या दक्षिणा राशि दें। माना जाता है कि कन्या पूजन से आपके घर में धन-धान्य की कोई कमी नही रहती और परिवार में सुख-समृधि बनी रहती है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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