अनेक दुर्गोत्सव समितियाँ प्रतिमाओं की जगह करेंगी केवल घट की स्थापना
डिजिटल डेस्क जबलपुर । शारदेय नवरात्र पर्व इस वर्ष शनिवार 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है जो कि 25 अक्टूबर तक रहेगा। देवी की पूजा पूरे नौ दिनों तक होगी। कोरोना महामारी के चलते इस बार पर्व मनाया जा रहा है इसलिए अनेक दुर्गोत्सव समितियों द्वारा प्रतिमाओं की स्थापना नहीं करने का निर्णय लिया गया है। समितियों द्वारा केवल घट स्थापना कर नौ दिनों तक पूजन-अर्चन किया जाएगा। पर्व को लेकर देवी मंदिरों में भी तैयारियाँ की जा रहीं हैं। पं. रोहित दुबे ने बताया कि इस बार नवरात्रि की शुरूआत में 17 तारीख को ही सूर्य का राशि परिवर्तन भी होगा। सुर्य तुला में प्रवेश करेगा। तुला राशि में पहले से वक्री बुध भी रहेगा। इस कारण बुध-आदित्य योग बनेगा। इसके साथ ही 58 साल बाद शनि-गुरु का भी दुर्लभ योग बन रहा है। इस नवरात्रि में शनि मकर में और गुरु धनु राशि में रहेंगे। ये दोनों ग्रह 58 साल बाद नवरात्रि में एक साथ अपनी-अपनी राशियों में स्थित रहेंगे। सन् 2020 से पहले 1962 में यह योग बना था। उस समय 29 सितंबर से नवरात्रि शुरू हुई थी। पं. वासुदेव शास्त्री ने बताया कि इस साल नवरात्रि पूरे नौ दिनों की रहेगी। इसी दिन सूर्य तुला राशि में प्रवेश करके नीच का हो जाएगा। 17 तारीख को बुध और चंद्र भी तुला राशि में रहेंगे। चंद्र 18 तारीख को वृश्चिक में प्रवेश करेगा। लेकिन सूर्य-बुध का बुधादित्य योग पूरी नवरात्रि में रहेगा।
घोड़े पर सवार होकर आएँगी देवी - पं. राजकुमार शर्मा शास्त्री ने बताया कि शनिवार से नवरात्रि शुरू होने से इस बार देवी का वाहन घोड़ा रहेगा। नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है उसके अनुसार देवी का वाहन बताया गया है। अगर नवरात्रि सोमवार या रविवार से शुरू होती है तो देवी का वाहन हाथी रहता है। शनिवार और मंगलवार से नवरात्रि शुरू होती है तो वाहन घोड़ा रहता है। गुरुवार और शुक्रवार से नवरात्रि शुरू होने पर देवी डोली पर सवार होकर आती हैं। बुधवार से नवरात्रि शुरू होती है तो देवी का वाहन नाव रहता है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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