अगर हम कोई लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए हमें पूरी तैयारी करनी होती है। लक्ष्य से जुड़ी पूरी जानकारी के साथ ही धैर्य और कड़ी मेहनत भी जरूरी है। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक आश्रम में गुरु अपने कई शिष्यों के साथ रह रहे थे। सभी शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते थे और उनकी हर आज्ञा का पालन करते थे। एक दिन आश्रम में नया शिष्य आया।
नए शिष्य ने देखा कि सभी गुरु का बहुत सम्मान करते हैं। गुरु की हर बात मानते हैं। उसने संत से कहा कि गुरुजी मैं आपकी तरह ही जल्दी से जल्दी गुरु बनना चाहता हूं, मैं भी चाहता हूं कि मेरे कई शिष्य हों और मुझे से आपकी तरही ही मान-सम्मान मिले।
गुरु शिष्य की पूरी बात सुनी और कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए तुम्हें कई वर्षों तक कड़ी मेहनत करना होगी, धैर्य बनाए रखना होगा, ज्ञान हासिल करना होगा, तभी तुम्हें सफलता मिल सकती है। कठिन साधना के बाद ही अपनी योग्यता से तुम्हारी ये इच्छा पूरी हो सकती है।
शिष्य ने पूछा कि मुझे इंतजार क्यों करना पड़ेगा? मैं आज से ही शिष्यों को ज्ञान क्यों नहीं दे सकता? इसके बाद गुरु ने शिष्य को तख्त से नीचे खड़े होने के लिए कहा और गुरु स्वयं तख्त पर खड़े हो गए। इसके बाद गुरु ने शिष्य से कहा कि जरा मुझे ऊपर वाले तख्त पर पहुंचा दो।
गुरु की बात सुनकर शिष्य ने कहा कि गुरुजी, मैं खुद नीचे खड़ा हूं तो आपको ऊपर कैसे पहुंचा सकता हूं? इसके लिए तो मुझे भी ऊपर आना होगा। गुरु ने हंसते हुए कहा कि ठीक इसी तरह अगर तुम किसी शिष्य को ऊपर उठाना चाहते हो तो पहले तुम्हें खुद का स्तर भी ऊंचा करना होगा। तभी तुम अच्छे गुरु बन सकते हो। इसके लिए तुम्हें अपना ज्ञान बढ़ाना होगा। सही-गलत की समझ विकसित करनी होगी। गुरु की ये बातें शिष्य को समझ आ गई।
प्रसंग की सीख
इस प्रसंग की सीख यह है कि लक्ष्य कोई भी हो, उसमें सफलता तभी मिल सकती है, जब हमारे पास पर्याप्त जानकारी हो, धैर्य और कड़ी मेहनत के साथ ही सही समय का भी इंतजार करना चाहिए।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Source From
RACHNA SAROVAR
CLICK HERE TO JOIN TELEGRAM FOR LATEST NEWS

Post a Comment