डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा के लिए वैसे तो बुधवार का दिन शुभ माना जाता है। वहीं हर कार्य या पूजा से पहले भी श्री गणेश की पूजा करने का विधान है। इसके अलावा हर माह में दो बार गणेश चतुर्थी तिथि भी आती है, जब जातक व्रत रखने के साथ ही भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करता है, जो कि आज 20 सितंबर रविवार को है।
अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को ही विनायक चतुर्थी कहा जाता है। कई जगहों पर इसे वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस व्रत और पूजा से जीवन में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं। यानी कि समस्याओं के निवारण, आर्थिक संकट को दूर करने, सुख-समृद्धि, धन-दौलत में वृद्धि के लिए विनायक चतुर्थी को गणेश जी का आराधना की जाती है।
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विनायक चतुर्थी मुहूर्त
- सुबह स्नान करें, लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
- दोपहर पूजन के समय अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें।
- संकल्प के बाद षोडशोपचार पूजन कर श्री गणेश की आरती करें।
- इसके बाद श्री गणेश की मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ाएं।
- अब गणेश का प्रिय मंत्र- 'ॐ गं गणपतयै नम:' बोलते हुए 21 दूर्वादल चढ़ाएं।
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- श्री गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डुओं का ब्राह्मण को दान दें तथा 5 लड्डू श्री गणेश के चरणों में रखकर बाकी को प्रसाद स्वरूप बांट दें।
- पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें।
- ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें। अपनी शक्ति हो तो उपवास करें अथवा शाम के समय खुद भोजन ग्रहण करें।
- संध्या के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें।
- संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें तथा 'ॐ गणेशाय नम:' मंत्र की माला जपें।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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