डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देवी की उपासना का पर्व यानी कि नवरात्रि इस वर्ष पूरे एक माह की देरी से शुरू होगा। हर साल की तरह इस साल पितृपक्ष के अगले दिन से यह शुरू नहीं हो सका। इसका कारण अधिकमास है, जिसके कारण नवरात्र और पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ गया है। ज्योतिष की मानें तो ऐसा 165 साल बाद होने जा रहा है, जब श्राद्ध पक्ष के एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होगी।
पंचांग के अनुसार आश्विन मास की अमावस्या तिथि यानी सर्व पितृ अमावस्या के दिन महालया मनाई जाती है। महालया अमावस्या की खत्म होने के बाद शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। अब नवरात्रि का पर्व 17 अक्टूबर 2020 से 25 अक्टूबर 2020 तक मनाया जाएगा।
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शुभ कार्यों की शुरुआत
आपको बता दें कि अधिकमास जिसे मलमास भी कहा जाता है, इस माह में किसी भी तरह के शुभ कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन नवरात्रि का पर्व आरंभ होते हैं शुभ कार्यों की भी शुरूआत हो जाएगी। नवरात्रि आरंभ होते ही नई वस्तुओं की खरीद, मुंडन कार्य, ग्रह प्रवेश जैसे शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे। हालांकि शादी विवाह देवउठनी एकादशी तिथि के बाद ही आरंभ होंगे
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नवरात्रि तिथि |
दिन |
पूजा |
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17 अक्टूबर |
पहला दिन |
प्रतिपदा घटस्थापना |
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18 अक्टूबर |
द्वितीया |
मां ब्रह्मचारिणी पूजा |
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19 अक्टूबर |
तृतीय |
मां चंद्रघंटा पूजा |
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20 अक्टूबर |
चतुर्थी |
मां कुष्मांडा पूजा |
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21 अक्टूबर |
पंचमी |
मां स्कंदमाता पूजा |
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22 अक्टूबर |
षष्ठी |
मां कात्यायनी पूजा |
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23 अक्टूबर |
सप्तमी |
मां कालरात्रि पूजा |
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24 अक्टूबर |
अष्टमी |
मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महाअष्टमी पूजा |
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25 अक्टूबर |
नवमी |
मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण विजय दशमी |
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Source From
RACHNA SAROVAR
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