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महाभारत, पद्मपुराण, विष्णुस्मृति जैसे ग्रंथों की सीख, दूसरों की कपड़े न पहनें, स्नान के बाद किसी और का टॉवेल उपयोग नहीं करना चाहिए

अभी कोरोना महामारी तेजी से भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में फैल रही है। इस महामारी से बचाव के कुछ तरीके साफ-सफाई से संबंधित ही हैं। जैसे बार-बार हाथ धोना चाहिए, दूसरों के कपड़े या कोई और चीज उपयोग नहीं करनी चाहिए, बाहर से घर लौटकर स्नान करना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार ऐसी ही सीख महाभारत, पद्मपुराण, विष्णुस्मृति जैसे ग्रंथों में भी बताई गई हैं। इन बातों का ध्यान रखने पर बीमारियों से रक्षा होती है, संक्रमण की रोकथाम हो सकती है। जानिए कुछ खास श्लोक...

तथा न अन्यधृतं धार्यम्।

ये महाभारत के अनुशासन पर्व का श्लोक है। इसके अनुसार हमें दूसरों के पहने हुए कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयात्।

ये विष्णुस्मृति का श्लोक है। इसके अनुसार हमें पहने हुए कपड़ों को बिना धोए वापस नहीं पहनना चाहिए। कपड़ों को धोकर ही पहनें।

न चैव आर्द्राणि वासांसि नित्यं सेवेत मानव:।

ये महाभारत के अनुशासन पर्व का श्लोक है। इसके अनुसार कभी भी गीले कपड़े नहीं पहनना चाहिए। गीले कपड़ों की वजह से कफ से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं।

चिताधूमसेवने सर्वे वर्णा: स्नानम् आचरेयु:।
ये विष्णुस्मृति का श्लोक है। इसके अनुसार श्मशान में जाने के बाद घर लौटकर नहाना बहुत जरूरी है।

हस्तपादे मुखे चैव पंचार्द्रो भोजनं चरेत्।

ये पद्मपुराण का श्लोक है। इसके अनुसार हमें हाथ, पैर और मुंह धोकर ही भोजन करना चाहिए।

न धारयेत् परस्यैवं स्नानवस्त्रं कदाचन।

ये पद्मपुराण का श्लोक है। इसके अनुसार हमें स्नान के बाद दूसरों के स्नान वस्त्र यानी टॉवेल का उपयोग नहीं करना चाहिए।



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Source From
RACHNA SAROVAR
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