17 अगस्त से मलयालम सौर कैलेंडर का नया साल शुरू हो रहा है। हर साल जब 16 या 17 अगस्त को सूर्य अपनी ही राशि सिंह में आता है तब मलयालम नववर्ष शुरू होता है। मलयालम कैलेंडर के पहले महीने का नाम चिंगम है। इसी महीने में थिरुवोणम नक्षत्र के दिन ओणम पर्व मनाया जाता है। ये नक्षत्र हिंदू कैलेंडर में श्रवण नक्षत्र होता है। चिंगम महीने की शुरुआत के 4 दिन बाद ही अथम नक्षत्र यानी हस्त नक्षत्र से ओणम महोत्सव की शुरूआत हो जाती है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते केरल में नए साल की शुरुआत फीकी है। लोग सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर रहे हैं और खरीदारी में सावधानी रख रहे हैं।
साल के पहले दिन खरीदारी और मांगलिक काम
चिंगम महीने के पहले ही दिन केरल के लोग पारंपरिक ड्रेस पहनते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनकर मंदिरों में दर्शन कर नए साल की शुरुआत की जाती है। चिंगम महीने के पहले ही दिन खरीदारी का बहुत महत्व है। लोग नए व्हीकल, गहने, कपड़े और अन्य चीजें खरीदते हैं। इस दिन शादी और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक काम किए जाते हैं। नए कामों की शुरुआत भी इस दिन होती है। पहले जब लोगों का मुख्य पेशा कृषि होता था। तब चिंगम महीना फसल की कटाई की शुरुआत का संकेत देता था। इसके बाद ओणम पर प्रकृति को पहली फसल चढ़ाकर नए साल की खुशी मनाई जाती है। ये चावल की फसल का पर्व भी है।
चिंगम के पहले सप्ताह में शुरू होता है ओणम महोत्सव
चिंगम महीना शुरू होने के 4 से 5 दिन बाद ही केरल के मुख्य त्योहार ओणम पर्व की शुरुआत हो जाती है। 10 दिनों के इस पर्व में फसलों की कटाई होती है। जगह-जगह पर मेले लगते हैं। इन दिनों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। घरों की सफाई और सजावट होती हैं। घरों के बाहर रंगोली बनाई जाती है। इस महोत्सव के दौरान खासतौर से स्नेक बोट रेस का आयोजन किया जाता है। जिसे वल्लम कली कहा जाता है।
- पौराणिक कथा के अनुसार केरल में राजा महाबली के समृद्ध और खुशहाल राजकाल की याद में ये 10 दिन का महोत्सव मनाया जाता है। यह माना जाता है इन दिनों वो पाताल से पृथ्वी पर अपनी प्रजा को देखने आते हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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