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इस बार तिथियों की घट-बढ़ के बावजूद 16 दिन के रहेंगे श्राद्ध, पूर्वजों की तृप्ति के लिए तर्पण

डिजिटल डेस्क जबलपुर ।  इस बार पितृपक्ष की शुरूआत 2 सितंबर से हो रही है जो कि 17 सितंबर तक रहेगा। इन दिनों में पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जाएगा। पं. रोहित दुबे ने बताया कि इस बार तिथियों की घट-बढ़ के बावजूद पितरों की पूजा के लिए 16 दिन मिल रहे हैं।  पं. वासुदेव शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा से सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या तक 16 दिनों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष कहा जाता है। उन्होंने बताया कि ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्धपक्ष के 16 दिनों में पितृ वंशजों के घर वायु रूप में आते हैं, इसलिए उनकी तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पूजा-पाठ करने का विधान है। इस बार प्रतिपदा श्राद्ध 2 सिंतबर से शुरू होंगे। इस बार सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर को है।
प्रतिपदा श्राद्ध 2 से
6पूर्णिमा श्राद्ध  1 सितंबर को, 6 प्रतिपदा श्राद्ध 2 सितंबर, 6 द्वितीया श्राद्ध 3 सितंबर,  6 तृतीया श्राद्ध 4 व 5 सितंबर,  6 चतुर्थ श्राद्ध 6 सितंबर,  6 पंचम श्राद्ध 7 सितंबर,  6 छठवाँ श्राद्ध 8 सितंबर,  6 सातवाँ श्राद्ध 9 सितंबर,  6 आठवाँ श्राद्ध 10 सितंबर,  6 नौवाँ श्राद्ध 11 सितंबर,  6 दसवाँ श्राद्ध 12 सितंबर,  6 ग्यारहवाँ श्राद्ध 13 सितंबर, 6 बारहवाँ श्राद्ध 14 सितंबर,  6 तेरहवाँ श्राद्ध 15 सितंबर,  6 चौदहवाँ श्राद्ध 16 सितंबर,  6 पंद्रहवाँ श्राद्ध 17 सितंबर, (सर्वपितृ अमावस्या) रहेगा।
क्या है पितृपक्ष  
 पं. राजकुमार शर्मा  शास्त्री ने बताया कि पितृ पक्ष अपने कुल, परंपरा और पूर्वजों को याद करने और उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लेने का समय है। इसमें व्यक्ति का पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ अर्पित किया गया तर्पण यानी जलदान और पिंडदान यानी भोजन का दान श्राद्ध कहलाता है। पूर्वजों की पूजा और उनकी तृप्ति के लिए किए गए शुभ कार्य जिस विशेष समय में किए जाते हैं उसे ही पितृपक्ष कहा गया है।
 



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This time, Shraddha will remain for 16 days despite the fluctuation of dates.
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Source From
RACHNA SAROVAR
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